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CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Set 2 with Solutions
समय: 3 घंटे
अधिकतम अंक : 80
सामान्य और आवश्यक निर्देश:
- इस प्रश्न पत्र में दो खंड हैं- खंड ‘अ’ और ‘ब’ कुल प्रश्न 13 हैं।
- ‘खंड ‘अ’ में 45 वस्तुपरक प्रश्न पूछे गए हैं, जिनमें से केवल 40 प्रश्नों के उत्तर: देते हैं।
- खंड ‘ब’ में वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं, प्रश्नों के उचित आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
- प्रश्नों के उत्तर: दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए दीजिए।
- दोनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर: देना अनिवार्य है।
- यथासंभव दोनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर: क्रमशः लिखिए।
खण्ड – ‘अ’
वस्तुपरक प्रश्न (40 अंक)
प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए- (1×10=10)
जो समाज को जीवन दे, उसे निर्जाव कैसे माना जा सकता है? जलस्रोत में जीवन माना गया और समाज ने उसके चारों ओर अपने जीवन को रचा। जिसके साध जितना निकट का संबंध, जितना स्नेह, मन उसके उतने ही नाम रख लेता है। देश के अलग-अलग राज्यों में, भाषाओं में, बोलियों में तालाब के कई नाम हैं। बोलियों के कोश में, अनेक व्याकरण के ग्रंथों में, पर्यायवाची शब्दों की सूची में तालाब के नामों का एक भरा-पूरा परिवार देखने को मिलता है। डिंगल भाषा के व्याकरण का एक ग्रंध हमीर नाम-माला तालाबों के पर्यायवावी नाम तो गिनाता ही है, साथ ही उनके स्वभाब का भी वर्णन करते हुए, तालाखों को धरम सुभाव कहता हैं।
गड़ा हुआ धन सबको नहीं मिलता, लेकिन सबको तालाब से जोड़कर देखने के लिए भी समाज में कुछ मान्यताएँ रही हैं। अमावस और पूनों, इन दो दिनों को कारज यानी अच्छे और वह भी सार्वजनिक कामों का दिन माना गया है। इन दोनों दिनों में निजी काम से हटने और सार्वजनिक कामों से जुड़ने का विधान रहा है। किसान अमावस और पूनों को अपने खेत में काम नहीं करते थे। उस समय का उपयोग वे अपने क्षेत्र के तालाख आदि की देखरेख व मरम्मत में लगाते थे। समाज में श्रम ही पूँजी है और उस पूँजी को निजी हित के साथ सार्वजनिक हित में भी लगाते थे। श्रम के साथ-साथ पूँजी का अलग से प्रबंध किया जाता रहा है।
इस पूँजी की जरूरत प्राय; ठंड के बाद, तालाब में पानी उतर जाने पर पड़ती है। जय गरमी का मौसम सामने खड़ा होता हैं और यही सबसे अच्छा समय है, तालाब की किसी बड़ी टूट-फूट पर ध्यान देने का। वर्ष की बारह पूर्णिमाओं में से ग्यारह पूर्णिमाओं को श्रमदान के लिए रखा जाता रहा है पर पूस मास की पूर्नों पर तालाब के लिए ध्रान या पँसा एकत्र किए जाने की परंपय रही है। सार्वजनिक तालाबों में तो सबका श्रम और पूँजी लगती ही थी, निहायत निजी किस्म के तालाबों में भी सार्वजनिक स्पर्श आवश्यक माना जाता रहा है। तालाब बनने के बाद उसे इलाके के सभी सार्वजनिक स्थलों से थोड़ी-थोड़ी मिद्टी लाकर तालाब में डालने का चलन आज भी मिलता हैं।
तालाबों में प्राण हैं। अतः प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव ब्रटी धूमधाम से होता था। कही-कहीं तालाबों का दूरत ।.: के साथ विवाह भी होता था। छतीसगढ़ में यह प्रथा आज भी जारी है। विवाह से पहले तालाब का उपयोग नहीं हो सकता। न तो उससे मानी निकालेंगे और न उसे पार करेंगे। विवाह में क्षेत्र के सभी लोग, सारा गाँव पाल पर उमड़ आता है। आस-पास के मंदिरों में मिद्टी लाई जाती है, गंगाजल आता है और इसी के साथ अन्य पाँच या सात कुओं या त्रलाबों का जल मिलाकर विकाह पूरा होता है। इन तालाबों के दीर्ष जीवन का एक ही रहस्य था-ममत्व। यह मेरा है, हमारा है।
ऐसी मान्यता के बाद रख-रखाव जैसे शब्द छोटे लगने लगेगे। घरमेल यानी सब घरों के मेल से तालाब का काम होता का। सबका मेल तीर्थ है। जो तीर्थ न जा सके, वे अपने यहाँ तालाब बनाकर ही पुण्य ले सकते हैं। तालाख बनाने वाला पुख्यात्मा है, महात्मा है। जो तालाब बचाए, उसकी भी उतनी ही मान्यता मानी गई है। इस तरह वालाब एक तीर्थ है। यहाँ मेले लगते हैँ और इन मेलों में जुटने वाला समाज़ तालाब को अपनी औँखों में, मन में बसा लेता है। तालाय समाज के मन में रहा है और कही-कही लो उसके तन में भी। बहुत से बनवासी-समाज गुदने में कालाब, बवड़ी भी गुदवाते हैं।
गुदनों के चिन्हों में पशु-पक्षी, फल आदि के साथ-साथ सहरिया समाज में सीता बावड़ी और साधारण बावड़ी के चिन्ह भी प्रचलित हैं। सहरिया शबरी को अपना पूर्वज मानते है। सीता जी से विशेष संबंध है। इसलिए, सहरिया अपनी पिडंलियों पर सीता आवड़ी बहुत चाव से गुद्याते हैं। जिसके मन में, तन में तालाब रहा हो, वह तालाब को केवल पानी के एक गड़े की तरह नहीं देख सकेगा। उसके लिए तालाय एक जीवंत परंपरा है, परिवार है और उसके कई संबंध, संबंधी है। तालाब का लबालब भर जाना भी एक बड़ा उत्सव बन जाता है। समाज के लिए इससे बड़ा और कौन-सा प्रसंग होगा कि तालाब की अपरा चल निकलती है।
भुज (कचछ) के सबसे बड़े तालाख्न हमीरसर के घाट में बनी हाधी की एक मूर्ति अपना चलने की सूचक हैं। जब-जब इस मूर्ति को छू लेता तो पूरे शहर में खबर फैल जाती थी। शहर तालाब के घाटों पर आ आता। कम पानी का इलाका इस घटना को एक त्योहार में बदल देता। भुज के राजा घाट पर आते, पूरे शहर की उपस्थिति में तालाब की पूजा करते और पूरे भरे तालाब का आशीवाद लेकर लौटते। तालाब का पूरा भर जाना, सिर्फ एक घटना नहीं, आनंद है, मंगल सूचक है, उत्सव हैं, महोत्सव है। वह प्रजा और राजा को घाट तक ले आता था। कोई भी तालाब अकेला नही है।
वह भरे-पूरे जल परिवार का एक सदस्य हैं। उसमें सबका पानी है और उसका पानी सबमें है-ऐसी मान्यता रखने वालों ने एक तालाब सचमुच ऐसे ही बना दिया था। जगन्नाथपुरी के मंदिर के पास बिंदुसागर में देश भर के हर जल स्रोत का नदियों और समुद्रों तक का पानी मिला हैं। दूर-दुर से, अलग-अलया दिशाओं से पुरी आने वाले घक अपने साथ अपने क्षेत्र का थोड़ा सा पानी ले आते है और उसे बिंदुसागर में अर्पित कर देते है। देश की एकता की परीक्षा की इस घड़ी में बिंदुसागर राष्ट्रीय एकता का सागर कहला सकता है। बिंदुसागर, जुड भारत का प्रतीक है।
(क) बिंदुसागर राष्ट्रीय एकता का सागर क्यों कहला सकता है?
(i) क्योंकि उसमें देश के हर जल स्वोत का पानी मिला हुआ है।
(ii) क्योंकि पुरी में सभी दिशाओं से दर्शनार्थी आते हैं।
(iii) क्योंक पुरी में जगान्नाथ जी का मंदिर है।
(iv) ब्योंकि वहाँ किसी के आने जाने पर कोई मनाही नहीं है।
उत्तर:
(i) क्योंकि उसमें देश के हर जल स्वोत का पानी मिला हुआ है।
(ख) अमावस्या और पूर्णिमा के संबंध में लोगों की क्या मान्यता है?
(i) इस दिन सभी पूजा-पाठ में व्यस्त रहते है।
(ii) इस दिन लोग अपने निजी कायों से हटकर सार्वजानिक कायों को महत्व देते हैं।
(iii) इस दिन लोग अपने सार्वजानिक कार्यों से हटकर निजी कायों को महत्व देते है।
(iv) इस दिन लोग अपने सार्वंजानिक और निजी कायों को महत्च देते हैं।
उत्तर:
(ii) इस दिन लोग अपने निजी कायों से हटकर सार्वजानिक कायों को महत्व देते हैं।
(ग) तालाब को तीर्थ क्यों माना गाया है?
(i) क्योंकि त्रालाव में पानी होता है।
(ii) क्यॉकि तालाब सबको पानी देता है।
(iii) क्यॉकि तालाब सब घरों के मिले-जुले प्रयासों से बनता है।
(iv) क्योंकि सबका मेल ही तीर्थ है।
उत्तर:
(iii) क्यॉकि तालाब सब घरों के मिले-जुले प्रयासों से बनता है।
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(घ) ‘तालाब का पूरा भर जाना सिर्फ एक घटना नहीं, महोत्सव है।’ कैसे?
(i) क्योंकि तालाब तन-मन में बसा हुआ है।
(ii) क्योकि तालाब तीथ है।
(iii) क्योकि भारत में भरे-पूरे, तालाब की पूजा की जाती है।
(iv) क्योंकि तालाब में पानी भरा रहता है।
उत्तर:
(iii) क्योकि भारत में भरे-पूरे, तालाब की पूजा की जाती है।
(ङ) कोई भी तालाब अकेला नहीं है-ऐसा क्यों कहा गया है?
(i) क्योकि तालाब राजा और प्रजा को घाट पर ले आता है।
(ii) क्यौकि तालाब सबका सम्मिलित प्रयास है।
(iii) क्योंकि तालाब में सब पानी डालते है।
(iv) क्योंकि यह एक जलस्त्रोत है।
उत्तर:
(i) क्योकि तालाब राजा और प्रजा को घाट पर ले आता है।
(च) सहरिया सीता जी से विशेष सम्बन्ध किस प्रकार दर्शाते है?
(i) शबरी से लगाव रखते हुए
(ii) अपने शरीर पर सीता बाबड़ी गुदवाकर
(iii) अपने शरीर पर फल-फूल गुदवाकर
(iv) सीता जी से सम्बन्थ रखते हुए
उत्तर:
(ii) अपने शरीर पर सीता बाबड़ी गुदवाकर
(छ) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
(I) घर के मेल से तालाब का काम होता था।
(II) तालाब बनाने वाला पुण्यातमा माना जाता था।
(III) तालाब में पानी का अभाव होता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही हैं?
(i) केवल 1
(ii) केवल III
(iii) I और II
(iv) II और III
उत्तर:
(iii) I और II
(ज) पूस मास की पूनों पर क्या किया जाता है?
(i) तालाब के लिए भ्रमदान
(ii) तालाब के लिए जल एकत्रित करना
(iii) तालाब के लिए धान और पैसा एकत्रित करना
(iv) तालाब के लिए लोग एकत्रित करना
उत्तर:
(iii) तालाब के लिए धान और पैसा एकत्रित करना
(झ) तालाब के दीघ जीवन का रहस्य क्या है?
(i) श्रमदान
(ii) जलदान
(iii) अन्नदान
(iv) ममत्व
उत्तर:
(iv) ममत्व
(ञ) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पड़िए उसके बाद दिए विकल्पों में से एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) : बिन्दुसागर में देश भर के हर जल स्त्रोल का नदियों और समुद्रों का पानी मिला है।
कारण (R) : बिन्दुसागर को राष्ट्रीय एकता का सागर कहना कोई अतिशयोकित नहीं है।
(i) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
(iii) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(iv) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
उत्तर:
(i) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 2.
निम्नलिखित पद्यांशों में से किसी एक पद्यांश से संबंधंधित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चयन द्वारा दीजिए- (1 x 5 = 5)
जिसमें स्वदेश का मान भरा
आजादी का अभिमान भरा
जो निर्भय पथ पर बढ़ आए
जो महाप्रलय में मुस्काए
जो अंतिम दम तक रहे छटे
दे दिए प्राण, पर नहीं हटे
जो देश-राष्ट्र की वेदी पर
देकर मस्तक हो गएए अमर
ये रक-तिलक-भारत-ललाट?
उनको मेरा पहला प्रणाम।
फिर वे जो अधी बन भीषण
कर रहे आज दुश्मन से रण
बाणों के पवि-संधान बने
जो ज्वालामुख- हिमवान बने
हैं टूट रहे रिपु के गढ़ पर
बाधाओं के पर्वत चढ़कर
जो न्याय-नीति को अर्पित हैं भारत के लिए समर्पित हैं
कीर्तित जिससे यह धरा धाम
उन वीरों को मेरा प्रणाम
श्रद्धानत कवि का नमस्कार
दुर्लभ है छंद- प्रसून हार
इसको बस वे ही पाते हैं
जो चढ़े काल पर आते हैं
हुंकृति से विश्व काँपते हैं
पर्वत का दिल दहलाते हैं
रण में त्रिपुरांतक बने शिव
कर ले जो रिपु का गर्व खर्च
जो अग्नि-पुत्र, त्यागी, अकाम
उनको अर्पित मेरा प्रणाम !
(क) कवि किन वीरों को प्रणाम करता है?
(i) जिनमें अपने देश के प्रति मान भरा हुआ है।
(ii) जिन्होंने अपने देश में जन्म लिया है।
(iii) जो यहाँ पले-बड़े हैं।
(iv) जो यहाँ खेले हैं।
उत्तर:
(i) जिनमें अपने देश के प्रति मान भरा हुआ है।
(ख) भारत के माथे का लाल चंदन किन्हें कहा है?
(i) जो भारत के वीर हैं।
(ii) जिन्होंने देश के लिए प्राण न्योछावर कर दिए।
(iii) जिन्होंने देश को अपना बनाया।
(iv) जो देश के लिए जन्मे हैं।
उत्तर:
(ii) जिन्होंने देश के लिए प्राण न्योछावर कर दिए।
(ग) दुश्मनों पर भारतीय सैनिक किस तरह वार करते हैं?
(i) वीरों की तरह
(ii) सैनिकों की तरह
(iii) आँधी की तरह
(iv) पानी की तरह
उत्तर:
(iii) आँधी की तरह
(घ) कवि किनका सम्मान करता है?
(i) उन वीरों का जो इस देश की धरती में बड़े हुए हैं।
(ii) उन वीरों को जो सैनिक हैं।
(iii) उन वीरों को जिन्हें नमन करते हैं।
(iv) उन वीरों का जो अपनी हुंकार से विश्व को कंपा देते हैं।
उत्तर:
(iv) उन वीरों का जो अपनी हुंकार से विश्व को कंपा देते हैं।
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(ङ) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
(I) भारत के वीर सैनिकों के त्याग के कारण ही राष्ट्र स्वतंत्र हुआ है।
(II) वीरों की हुंकृति से विश्व काँप जाते हैं।
(III) लोग स्वयं को वीर मानते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा / कौन-से सही हैं?
(i) केवल I
(ii) केवल III
(iii) I और II
(iv) II और III
उत्तर:
(iii) I और II
अथवा
जब गीतकार मर गया, चाँद रोने आया,
चांदनी मचलने लगी कफन बन जाने को
मलयानिल ने शव को कन्धों पर उठा लिया,
वन ने भेजे चन्दन श्री खंड जलाने को !
सूरज बोला, यह बड़ी रोशनीवाला था,
मैं भी न जिसे भर सका कभी उजियाली से,
रंग दिया आदमी के भीतर की दुनियां को,
इस गायक ने अपने गीतों की लाली से !
बोला बूढ़ा आकाश, ध्यान जब यह धरता,
मुझमे यौवन का नया वेग जम जाता था।
इसके चिंतन में डुबकी एक लगाते ही,
तन कौन कहे, मन भी मेरा रंग जाता था।
देवों ने कहा, बड़ा सुख था इसके मन की
गहराई में डूबने और उतराने में।
माया बोली, मैं कई बार थी भूल गयी,
अपने ही गोपन भेद इसे बतलाने में !
योगी था, बोला सत्य भागता मैं फिरता,
वह जान बढ़ाये हुए दौड़ता चलता था,
जब-तब लेता यह पकड़ और हंसने लगता,
धोखा देकर मैं अपना रूप बदलता था !
मर्दों को आई याद बांकपन की बातें,
बोले, जो हो, आदमी बड़ा अलबेला था।
जिसके आगे तूफान अदब से झुकते हैं,
उसको भी इसने अहंकार से झेला था !
नारियां बिलखने लगीं, बांसुरी के भीतर
जादू था कोई अदा बड़ी मतवाली थी।
गर्जन में भी थी नमी, आग से भरे हुए,
गीतों में भी कुछ चीज रुलाने वाली थी !
वे बड़ी-बड़ी आँखें आंसू से भरी हुई,
पानी में जैसे कमल डूब उतराता हो,
वह मस्ती में झूमते हुए उसका आना,
मानो, अपना ही तनय झूमता आता !
चिंतन में डूबा हुआ सरल भोला-भाला,
बालक था, कोई दिव्य पुरुष अवतारी था,
तुम तो कहते हो मर्द, मगर, मन के भीतर,
यह कलावंत हमसे भी बढ़कर नारी था।
(क) गीतकार को किसने अपने कन्धों पर उठा लिया?
(i) मलय पर्वत पर चलने वाली शीतल हवाओं ने
(ii) चाँदनी ने
(iii) चाँद ने
(iv) जंगल ने
उत्तर:
(i) मलय पर्वत पर चलने वाली शीतल हवाओं ने
(ख) आकाश किसके गीतों में खो जाता है?
(i) स्वयं के
(ii) कवि के
(iii) चाँद के
(iv) जंगल के
उत्तर:
(ii) कवि के
(ग) कवि कैसा व्यक्ति था?
(i) सहनशील
(ii) स्वाभिमानी
(iii) निराश
(iv) सहनशील और स्वाभिमानी
उत्तर:
(iv) सहनशील और स्वाभिमानी
(घ) पद्यांश में कवि की क्या विशेषता बताई गई है?
(i) उसके आगे तूफान भी झुकते थे।
(ii) उसकी मृत्यु हो चुकी थी।
(iii) वह ऊर्जावान नहीं था।
(iv) उसने गीत गाना बंद कर दिया था।
उत्तर:
(i) उसके आगे तूफान भी झुकते थे।
(ङ) कवि के बारे में सोचकर आकाश कैसा अनुभव करता था?
(i) ऊर्जावान
(ii) प्रकाशवान
(iii) अंधकारमय
(iv) असहनीय
उत्तर:
(i) ऊर्जावान
प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। (1 x 5 = 5)
(क) भारत में पहला छापाखाना क्यों खोला गया?
(i) मिशनरियों की धर्म प्रचारक पुस्तकें छापने के लिए।
(ii) जनता को जागरूक करने के लिए।
(iii) यूरोप के पुनर्जागरण के लिए।
(iv) तीनों कथन सही हैं।
उत्तर:
(i) मिशनरियों की धर्म प्रचारक पुस्तकें छापने के लिए।
(ख) टी.वी पर घटनाओं को देखकर उनकी _________ का एहसास होता है।
(i) असत्यता
(ii) जीवंतता
(iii) प्राचीनता
(iv) कोई नहीं
उत्तर:
(ii) जीवंतता
(ग) हिंदी में नेट पत्रकारिता की शुरुआत _________ के साथ हुई।
(i) कंप्यूटर
(ii) वेब दुनिया
(iii) वेब जगत
(iv) वेब संसार
उत्तर:
(ii) वेब दुनिया
(घ) उल्टा पिरामिड शैली में सबसे निचले स्तर पर होता है-
(i) इंट्रो
(ii) मुखड़ा
(iii) बॉडी
(iv) समापन
उत्तर:
(iv) समापन
(ड) कॉलम ‘क’ का कॉलम ‘ख’ से उचित मिलान कीजिए।
| कॉलम ‘क’ | कोलम ‘ख’ |
| (a) खबर का घटना स्थल से सीधा प्रसारण | (I) विवरणात्मक रिपोर्ट |
| (b) दृश्यों के आधार पर लिखी हुई खबर | (II) लाइव |
| (c) किसी घटना का बारीक विवरण | (III) विशेष लेखन के क्षेत्र |
| (d) शिक्षा और स्वास्थ्य | (IV) एंकर विजुअल |
(i) – (IV), (b) – (III), (IV), (c)- (I), (d) – (II)
(ii) (a) – (II), (b) – (IV), (c) – (I), (d) – (III)
(iii) (a)-(II), (b)-(I), (c)- (IV), (d) – (III)
(iv) (a)-(1), (b)-(II), (c)- (III), (d)- (IV)
उत्तर:
(ii) (a) – (II), (b) – (IV), (c) – (I), (d) – (III)
प्रश्न 4.
दिए गए काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए। (1 x 5 = 5)
अब अपलोकु सोकु सुत तोरा। सहहि निठुर कठोर उर मोरा ॥
निज जननी के एक कुमारा। तात तासु तुम्ह प्रान अधारा ॥
साँपेसि मोहि तुम्हहि गहि पानी सब बिधि सुखद परम हित जानी ॥
उतरु काह दैहऊँ तेहि जाई । उठि किन मोहि सिखावहु भाई ॥
बहु विधि सोचत सोचि बुमोचन। स्त्रवत सलिल राजिव दल लोचन ॥
उमा एक अखंड रघुराई। नर गति भगत कृपालु देखाई ॥
प्रभु प्रलाप सुनि कान, बिकल भए बानर निकर।
आइ गयउ हनुमान, जिमि करुना महं बीर रस ॥
(क) श्रीराम क्यों व्याकुल हैं?
(i) क्योंकि वे वन में हैं।
(ii) क्योंकि लक्ष्मण मूर्च्छित हैं।
(iii) क्योंकि वे रावण से युद्ध कर रहे हैं।
(iv) क्योंकि वे राजभवन में नहीं हैं।
उत्तर:
(ii) क्योंकि लक्ष्मण मूर्च्छित हैं।
(ख) श्रीराम किस बात को सोच कर व्याकुल हो रहे थे?
(i) लक्ष्मण वियोग को सहन कर लेंगे।
(ii) सुमित्रा माता को क्या जवाब देंगे।
(iii) अपयश सहन कर लेंगे।
(iv) वे अत्यंत दुखी हैं।
उत्तर:
(ii) सुमित्रा माता को क्या जवाब देंगे।
(ग) उमा एक अखंड रघुराई। नर गति भगत कृपालु देखाई’ के माध्यम से कवि ने क्या व्यक्त किया है?
(i) श्रीराम ईश्वर हैं।
(ii) वे सामान्य मनुष्य’ हैं।
(iii) वे सामान्य मनुष्य के समान विलाप कर रहे हैं।
(iv) वे अत्यंत व्याकुल हैं।
उत्तर:
(iii) वे सामान्य मनुष्य के समान विलाप कर रहे हैं।
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(घ) हनुमान के आगमन का क्या प्रभाव पड़ा?
(i) वानर सेना में उत्साह का संचार हो गया।
(ii) वानर सेना निराश हो गई।
(iii) राम विलाप करने लगे।
(iv) राम को पश्चाताप हुआ।
उत्तर:
(i) वानर सेना में उत्साह का संचार हो गया।
(ङ) काव्यांश की भाषा है-
(i) ब्रज भाषा
(ii) अवधी भाषा
(iii) हिंदी भाषा
(iv) भोजपुरी भाषा
उत्तर:
(ii) अवधी भाषा
प्रश्न 5.
दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए। (1 x 5 = 5)
जाति प्रथा पेशे का दोषपूर्ण पूर्वनिर्धारण ही नहीं करती, बल्कि मनुष्य को जीवन भर के लिए एक पेशे में बाँध भी देती है। भले ही पेशा अनुपयुक्त या अपर्याप्त होने के कारण वह भूखों मर जाए। आधुनिक युग में यह स्थिति प्रायः आती है, क्योंकि उद्योग-धंधों की प्रक्रिया व तकनीक में निरंतर विकास और कभी-कभी अकस्मात परिवर्तन हो जाता है, जिसके कारण मनुष्य को अपना पेशा बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है
और यदि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मनुष्य को अपना पेशा बदलने की स्वतंत्रता न हो तो इसके लिए भूखों मरने के अलावा क्या चारा रह जाता है? हिंदू धर्म की जाति प्रथा किसी भी व्यक्ति को ऐसा पेशा चुनने की अनुमति नहीं देती है, जो उसका पैतृक पेशा न हो, भले ही वह उसमें पारंगत हो। इस प्रकार पेशा परिवर्तन की अनुमति न देकर जाति प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कारण बनी हुई हैं।
(क) जाति प्रथा किसका पूर्वनिर्धारण करती है?
(i) पेशे का
(ii) मनुष्य का
(iii) जाति का
(iv) बेरोजगारी का
उत्तर:
(i) पेशे का
(ख) पेशे के पूर्वनिर्धारण का क्या दुष्परिणाम होता है?
(i) भूखों मरना
(ii) जीवनभर एक ही पेशे में बँधना
(iii) जाति प्रथा
(iv) अलग-अलग पेशे को अपनाना
उत्तर:
(ii) जीवनभर एक ही पेशे में बँधना
(ग) आधुनिक युग में पेशा बदलने की नौबत क्यों आ जाती है?
(i) उद्योग-धंधों की प्रक्रिया व तकनीक में निरंतर विकास होने के कारण
(ii) पूर्वजों के पेशे को अपनाने के कारण
(iii) नए पेशे को अपनाने के कारण
(iv) जीवनभर एक ही पेशे को अपनाने के ‘कारण
उत्तर:
(i) उद्योग-धंधों की प्रक्रिया व तकनीक में निरंतर विकास होने के कारण
(घ) गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
(I) पेशा परिवर्तन की अनुमति न होने के कारण बेरोजगारी में वृद्धि हो रही है।
(II) अनुपयुक्त पेशा होने के कारण अनेक बार भूखे मरने तक की नौबत आ जाती है।
(III) वर्तमान युग में जातिवाद जीवन की अनिवार्यता बन गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा / कौन-से सही हैं?
(i) केवल I
(ii) केवल III
(iii) I और II
(iv) II और III
उत्तर:
(iii) I और II
(ङ) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए उसके बाद दिए गए विकल्पों में से एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) : नवीन तकनीक के विकास के कारण कई बार मनुष्य को अपना पेशा बदलना पड़ सकता है।
कारण (R) : पेशा बदलने पर मनुष्य के पास भूखों मरने के अलावा कोई चारा नहीं है।
(i) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
(iii) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(iv) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
उत्तर:
(iv) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर हेतु निर्देशानुसार सही विकल्प का चयन कीजिए- (1 x 10 = 10)
(क) मनोहरश्याम जोशी ने अपना कैरियर किस पत्रिका में सहायक संपादक के पद पर कार्य करने के साथ शुरू किया?
(i) प्रतीक
(iii) हंस
(ii) सुधा
(iv) दिनमान
उत्तर:
(iv) दिनमान
(ख) यशोधर बाबू अपने बच्चों की गलतियों या बातों को किसका प्रमाण मानते हैं?
(i) बुढ़ापे का
(ii) जवानी का
(iii) वृद्धावस्था का
(iv) बचपन का
उत्तर:
(ii) जवानी का
(ग) यशोधर पंत द्वारा ‘नकली हँसी हँसने का अर्थ है-
(i) झूठमूठ हँसना
(ii) अपनी गलती जानना
(iii) खुश होना
(iv) हमेशा खुश रहना
उत्तर:
(ii) अपनी गलती जानना
(घ) लेखक के पिता कोल्हू पहले क्यों चलाना चाहते थे?
(i) पैसा बचाने के लिए
(ii) लेखक को परेशान करने के लिए
(iii) ईख की अच्छी कीमत लेने के लिए
(iv) पाठशाला न जाने के लिए
उत्तर:
(iii) ईख की अच्छी कीमत लेने के लिए
(ङ) ‘जूझ’ कहानी के लेखक के किस उपन्यास का प्रकाशन भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा किया गया है?
(i) गोदान
(ii) नटरंग
(iii) कसप
(iv) जूझ
उत्तर:
(ii) नटरंग
(च) लेखक की माँ ने लेखक के पिता के बारे में दत्ताजी को क्या बताया?
(i) दादा ने लेखक का खेत में जाना बंद कर दिया।
(ii) दादा सारा दिन रखमाबाई के पास गुजार देते
(iii) दादा खेती में समय व्यतीत करता है।
(iv) सभी विकल्प सही हैं।
उत्तर:
(iii) दादा खेती में समय व्यतीत करता है।
(छ) मोहनजोदड़ो की मोहरों में पशु अंकित नहीं है-
(i) घोड़ा
(iii) हाथी
(ii) शेर
(iv) गैंडा
उत्तर:
(i) घोड़ा
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(ज) सिन्धु घाटी सभ्यता के अद्वितीय वास्तु कौशल को स्थापित करने के लिए क्या अकेला ही काफी माना जाता है-
(i) बृहत् स्नानागार
(ii) अनुष्ठानिक महाकुंड
(iii) सभागार
(iv) माल गोदाम
उत्तर:
(ii) अनुष्ठानिक महाकुंड
(झ) हाथ बढ़ाने की परंपरा पन्त जी ने कहाँ सीखी थी?
(i) अल्मोड़ा में
(ii) दिल्ली में
(iii) शहर में
(iv) अपने घर में
उत्तर:
(i) अल्मोड़ा में
(ञ) सिंधु घाटी सभ्यता को लेखन ने कौन-सी संस्कृति कहा है?
(i) जल संस्कृति
(ii) नदी संस्कृति
(iii) महाकुं की संस्कृति
(iv) स्तूप की संस्कृति
उत्तर:
(i) जल संस्कृति
संड ‘ब्ब’
वर्णनात्मक प्रश्न (40 अंक)
प्रश्न 7.
लिए गए चार अप्रत्याशित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
(क) पर्यटन का महत्व
(ख) जो तोको काँटा बोवै, ताहि बोउ तू फूल
(ग) आतंकवाद और हम
(घ) चाँदनी रात और मैं
उत्तर:
(क) पर्यटन का महत्र:
मानव जिज्ञासु प्रवृत्ति का होता है और अपनी इसी प्रवृत्ति को शांत करने के लिए वह अलग-अलग स्थानों की यात्रा करता है, वहाँ की संस्कृति और सभ्यता, प्राकृतिक सौन्दर्य और वहाँ के इतिहास को वह जानना चाहता है। इसलिए, वह अनजान, दुर्गम व बीहड़ रास्तों पर घूमता रहता है। आधुनिक युग में अपने इस शौक की पूर्ति वह इंटरनेट व पुस्तकों के माध्यम से करता है। महापंडित राहुल सांकृत्यायन का कहना है-‘ घुमक्कड दुनिया की सर्वश्रेप्ठ विभूति है। इसलिए कि, उसी ने आज की दुनिया को बनाया है। अगर सुमक्कड़ों के काफिले 7 आते-जाते, तो सुस मानव-जातियौ सो आरीं औौर पशु सर से ऊपर नहीं उठ पातीं।’ आज ‘घुमक्कड्री’ का आधुनिक रूप ‘पर्यटन ‘ बन गया है।
पहले घुमक्कड़ी अल्यंत कष्टसाध्य थी क्योंकि संधार व यातायात के साधनों का अभाव था। संसाधन भी कम थे तथा पर्यटन-स्थल पर सुविघाएँ भी विकस्तित नहीं थीं। आज विज्ञान के प्रताप के कारण न तो मनुष्य को कहीं जने में कोई कठिनाई आती है और न ही उसे किसी कमी का सामना करना पह़ता है। आज मनुष्य में केवल उत्साह, बैर्य, साहस, जोखिम उठने की तर्परता होनी चाहिए, शेष सुविधाएँ तो विज्ञान ने दे ही रखी है। 20 रीं सदी से पर्यटन एक उद्योग के रूप में विकसित हो गया है। विश्व के लगभग सभी देशों में पर्यटन मंत्रालय बनाए गए है। हर देश अपने ऐतिह्ससिक स्थलों, अद्शुत भौगोलिक स्थलों को सज्-सँवारकर दुनिया के सामने प्रस्तुत करना चाहता है।
मनोरम पहाड़ी स्थलों पर पर्यटक आवास स्थापित किए जा रहे है। पर्यटकों के लिए यातायात के सभी प्रकार के सुलभ व आवश्यक साधनों की व्यवस्था की जा रही है। पर्यटन आज गुनाफा देने वाल व्यवसाय बन गया है। पर्यटन के अनेक लाभ हैं; जैसे-आनंद-प्राप्ति, जिज्ञासा की पूर्ति आदि। इसके अतिरिक, पर्यटन से अंतर्राष्ट्रीयता की समझ विकस्तित होती है। मनुष्य का दूष्टिकोण विस्तूत होता है। प्रेम व सौहार्द्र का प्रसार होता है। सभ्यता-संस्कृतियों का परिचय बढ़ता है। अंतर्राप्ट्रीय सहयोग की भावना को पर्यटन से ही बढ़ा मिलता है। पर्यटन के दोरान ही व्यकि को यधार्थ जीवन का आभास होता है तथा जीवन की एकरसता समाप्त होती है।
(ख) जो तोको काँटा बोवै, ताहि बोड नू फूल:
आमतौर पर व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आता है तो उसके व्यवहार की दो स्थितियाँ होती है-पहली में वह अपने संपर्क में आने वाले व्यक्ति के साध समान व्यवहार करता है तथा दूसरी स्थिति में व्यक्ति असमान व्यवहार करता है। अर्थात बुराई करने वाले के साथ भलाई या भलाई करने वाले के साथ बुराई करता है। बुराई के बदले भलाई करने वाला व्यक्ति महान होता है।
साभान्यतः जीवन को देखने के लिए यही सही दुष्टिकोण है। सज्जन की कसौटी दुर्जन है तो पुष्य की कसौटी पाप है। सझन व्यक्ति कभी कोई बुरा कार्य नहीं करता है। सरपथ पर बढ़ते चले जाना ही मनुष्य जीवन की सच्दी सार्थकता है। संसार में अनेक ऐसे व्यक्ति हुए है जिन्होंने हमेशा ही दूसरों की बुराइयों को नजरअंदाज कर उन्हें क्ष्मा किया।
श्रीराम, कृष्ण, पांडव, महात्मा बुद्ध आदि ऐसे ही मलपुरुष है। इससे यह सिद्ध होता है कि महान क्यकि ही इस विचार का पालन अपने जीवन में कर सकते है। महान व्यक्ति लाभ-हानि से प्रेरित होकर कोई काम नहीं करते है। जो लोग यह मानते है कि मनुष्य के सत्कर्म ही उसके जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है वे अपने व्यवहार में त्याग, तप, परोपकार को सर्वोच्च स्थान देते है। ऐसे लोग अपनी अंगुली काटने वाले को भी क्षमा करके उसके प्रति भलाई करते है।
ऐसे विचारक अहिंसावादी जीवन-दर्शन को मानकर सबके लिए भलाई के कार्य करते है। यदि व्यक्ति दूसरों की भलाई करना नहीं छोद्रता तो बुराई को कभी-न-कभी पराजय का मुँ देखना ही पड़ता है। असत्य का फल चमकते हुए रेत की तरह जल का श्रम पैदा कर सकता है, किंतु वह जल कदापि नहीं होता। इस प्रकार यह सिद्धांत आदर्शवादी रूप से मान्य हो सकता है कि जो हमारे साथ बुराई करे, हम उसके साथ भलाई करें, किंतु यथार्थ की दृष्टि से और आज के युग को देखते हुए यह सिद्धांत व्यावहारिक नहीं है।
(ग) आतंकवाद और हमा:
‘आतंक’ और ‘डर’ दोनों ही एक-दूसरे के पयाँय हैं। लोगों के मन में डर उत्पन्न करने के लिए आतंक को सामने लाया जाता है। अत: आतंक का प्रमुख उहेश्य लोगों के मन में भुय उत्पन्न करना है। आतंकवाद के कर्प हैराजनीतिक आतंकवाद, आर्थिक आतंकवाद, धार्मिक आतंकवाद आदि।
हमारे देश में आतंकवाद ने अपनी जड़ें बसूबी जमाई हुई हैं। आज भारत का कोई भी स्थान आतंकवाद से अछता नहीं है। यह आज भारत के प्रत्येक कोने में फैला हुआ है। भारत की प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री इंदिरा गांथी और राजीव गौधी भी जाने अनजाने ही आतंकवाद की भैट चढ़ गए थे। भारत में संसद भवन पर हमला, मुंबई में आतंकी हमले होना, जयपुर में सीरियल बलास्ट ये सब इसी आतंकवाद की ही देन है। आज भारत आतंक के साए चें ही जी रहा है। कब कहतं से आतंकी हमला हो जाए, इसका कुछ भी पता नहीं।
आज आतंकवाद ने पूरे संसार में अपने पैर जमाने शुरु कर दिए है और उसे काफी सफलता भी मिली है। विश्व में सबसे ताकतवर देश अमेरिका भी आतंकवाद से अछूता नहीं रहा। आज प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सारा संसार ही आतंकवाद से प्रभावित है। आतंकवाद आज एक ऐसी लाइलाज बीमारी के समान है जिसका समय रहते इलाज करना अत्यंत ही आवश्यक है क्योंकि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब विश्व से मानवता ही समाप्त हो जाए। अत: जरुरत है कि विश्व का प्रत्येक नागरिक एकजुट होकर स्वयं भी आतंकवाद का मुकाचला करे और सरकार की भी हरसंभव सहायता करे।
(घ) चौदनी रात और में:
सूर्य का प्रकाश मनुष्यों, पशुओं और पौधों के जीवन के लिए अत्यावश्यक है। यह स्फूतिंदायक होता है, लेकिन चन्द्रमा के प्रकाश के साथ सदैव कुछ-न-कूछ रोमांच जुड़ा रहता है। यह बड़ा शीतल और स्नेहिल होता है। चौदनी रातें बड़ी शानदार और मोहक होती हैं। एकान्तप्रिय मनुष्य के लिए तो पूर्णिमा की रात जीवन की सबसे सुखद रात होती है। मूं अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था। रात हो गई थी। अचानक मेरी नजर खिड़की से बाहर आसमान पर पड़ी जहॉँ पूर्ण चद्रमा धीरे-थीरे आसमान पर ऊपर उठते हुए मुहे अपने पास बुला रहा था। मैने एकदम पदाई छोड़ दी और बाहर जाकर चौँदनी में सँर करने का निश्चय किया।
चाँद धीरे-थीरे आसमान पर ऊपर चन्न रहा था। ऐसे ही किसी दूश्य को देखकर कवि ने चौदद से पूहा धा कि क्या तुम चट्मान की थकान से पीले पड़ गए हो तुम पूथ्वी को क्यों निहारते हो, आसमान में अकेले क्यों भटकते हो। काश! में भी कवि होता अथवा चित्रकार। यदि में ऐसा होता तो शब्दों या रंगों में उस अलॉकिक चैद्रछटा का ठीक-ठीक वर्णन कर पाता।
वृक्षा एकदम शांत थे। उन पर छिटकी हुई चाँदनी देवताऑं का आलौकिक प्रभामंडल-सा लग रहा था। एकाएक काले बादल का एक टुकडा दिखाई पड़ा। वह चौँद के सामने आ गया। उसे देखकर ऐसा लगा जैसे यह डुकड़ा किसी सुन्दर स्वी के चेहरे पर काले दाग-सा है। अचानक मुझे एक संस्कृत कवि की कविता का एक अंश याद आ गया। उन्होंने कहा था कि “चौँदनी इतनी सुन्दर और आलाँकिक है कि चाँदनी को दूथ समझकर बिल्ली जमीन चाटने लगी।”
प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए- (3 x 2 = 6)
(क) रेडियो नाटक में संवादों की भाषा का क्या महत्व है? उदाहरण सहित समझाइए।
(ख) कविता क्या है और यह कैसे बनती है?
(ग) कहानी में पात्रों का चरित्र चित्रण कैसे किया जाता है?
उत्तर:
(क) रेडियो नाटक में संवादों का महत्वपूर्ण स्थान है। पात्रों से संबंधित सभी जानकारियाँ हमें संवादों के माध्यम से ही मिलती है। अतः संवादों की भाषा पर विशेष ध्यान देना होता है। किसी पान्र की जानकारी जैसे वह पढ़-लिखा है या नहीं, शहरी है या ग्रामीण, उसकी उम क्या है, वो क्या रोजगार करता है, ये सब हमें संवादों की भाषा से ही पता चलता है। एक व्यकि अपने मौकर से अलग तरीके से बात करेगा, अपने बॉस से अलग तरीके से, अपने मित्रों से अलग तरीके से और अपने बच्चों से अलग तरीके से।
ये सब उसके संवादों की भाषा से पता चलता है। रेडियो नाटक वास्तव में संवाद प्रधान नाटक है। इसलिए, यहाँ संवादों और उनकी भाषा महत्वपूर्ण होती है। रेडियो नातक में हम पात्रों को देख नहीं पाते इसलिए, उनके नाम लेने आवश्यक होते है। उनके द्वारा किए गए एक्शन, हरकतें आदि को भी संवाद का ही हिस्सा बनाना पड़ता है।
(ख) कविता के मूल में संवेदना है, राग तत्व है। यह संवेदना, संपूर्ण सूष्टि से जोडने और उसे अपना लेने का बोध है। कविता एक ऐसी कला है जिसमें किसी बाह्न उपकरण की मदद नहीं ली जा सकती है और न ही इसके लिए कोई प्रशिक्षण होता है। भाषा के विधिन्न उपकरणों के माध्यम से ये विभिन्न विषयों और दैनिक जीवन से सामग्री लेती है।
वह अपनी इच्छानुसार शब्दों को जुटाती और उसे लय से गटित करती है। शब्दों का खेल, परिवेश के अनुसार शब्द चयन, लय, तुक, वाक्य संरचना, यति-गति, बिंब, संक्षिप्तता के साथ-साथ विभिन्न अर्थ स्तर अदि से कविता बनती है। एक अच्छी कविता सवाल करती है। सुने और पढ़्े जाने के बाद भी वह स्मृति में बची रह जाती है बार-बार सोचने के लिए।
(ग) कहानी में पात्रों का चरित्र-चित्रण उनके क्रिया-कलापों, संवादों तथा दूसरे पात्रों द्वारा बोले गए संवादों के माध्यम से ही प्रभावशाली होता है। पात्रों का चरित्र-चित्रण पात्रों की अभिरचियों के माध्यम से भी होता है। प्रत्येक पात्र का अपना स्वरूप, स्वभाव और उद्देश होता है।
प्रश्न 9.
निम्नलिखित तीन में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 80 शब्दों में दीजिए। (4 x 2 = 8 )
(क) टेलीविजन लेखन पर टिप्पणी कीजिए।
(ख) एडवोकेसी पत्रकारिता पर प्रकाश डालिए।
(ग) घटनापरक और साहित्यिक फीचर को समझाइए ।
उत्तर:
(क) टेलीविजन लेखन में सवांधिक अहमियत दूश्यों की होती है क्योंकि यह दूश्य और श्रव्य माध्यम है। इसके लिए समाचार या आलेख लिखते समय इस बात पर अधिक ध्यान दिया जाता है कि इसके शब्द परदे पर दिखाए जाने वाले दूश्यों के अनुकूल हों। टेलीविजन लेखन समाचार और आलेख लेखन से पूर्णतया भिन्न है क्यौंकि उसमें दूश्यों का कोई स्थान नहीं होता।
टेलीविजन में कम-से-कम शब्दों में अधिक-से-अधिक खबर बताने की कला होती है। इसलिए, इसके लिए खबर लिखते समय दूश्य पर विशोष ध्यान दिया जाता है। दूश्य अथात कँमरे से लिए गए शौट्स के आधार पर खबरों का ताना-बाना बुना जाता है। उदाहरण के ताँर पर यदि दूश्य समुद्र से संबंधित है। तो उसके शब्द भी पानी से ही संबंधित हैंगे।
(ख) अनेक ऐसे समाचार संगठन होते हैं जो किसी खास उदेश्य या विचारधारा के साथ आगे बढ़ते हैं और उसके पक्ष में जनमत बनाने के लिए जोर-शोर से अभियान चलाते है। इस प्रकार की पत्रकारिता एडवोकेसी पत्रकारिता कहलाती है। हमारे देश में भी कुछ समाचारपत्र या टेलीविजन चैनल किसी खास उदेश्य के लिए जनमत बनाते हैं और सरकार को उसके अनुकूल कार्य करने के लिए, अभियान चलाते है। उदाहरण के लिए निभैया काण्ड के दोधियों को सजा दिलाने के लिए समाचार माध्यमों ने अभियान चलाया।
(ग) घटनापरक फीचर- इसके अंतर्गत युद्ध, अकाल, दंगे, बीमारियाँ, आन्दोलन आदि से संबंधित विषय आते हैं। प्राकृतिक घटनाएँ; जैसे पर्वतारोहण, यात्राएँ आदि भी इसके अंतर्गंत आते है। कोविड-19 से संबंधित सूचना इसी का उदाहरण है।
साहित्यिक फीचर- इसके अंतर्गत साहित्य से सम्बन्धित गतिविधियाँ, पुस्तकें, स्ताहित्यकार आदि से संबंधित विषय आते है।
प्रश्न 10.
निम्नलिखित तीन में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए। (3 x 2 = 6)
(क) ‘कविता के बहाने’ के आधार पर कविता के असीमित अस्तित्व को स्पष्ट कीजिए।
(ख) कुंभकरण ने रावण को किस सच्चाई का आइना दिखाया?
(ग) दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ कविता का उद्देश्य बताइए।
उत्तर:
(क) ‘कविता के बहाने’ में कविता का असीमित अस्तित्व प्रकट किया गया है। इस असीमित अस्तित्व को प्रकट करने के लिए कवि ने चिडिया की उड़ान का उदाहरण दिया है। उनके अनुसार चिड़िया की उड़ान असीमित नहीं होती है, परंतु कल्पना की उड़ान असीमित होती है। कविता की कल्पना का दायरा तो बिना किसी सहायता के पल भर में ही कहीं-से-कहीं पहुँच जाता है।
चिडििया की उड्शान घर के अंदर या बाहर, एक घर से दूसरे घर तक या खुले आसमान की सीमित सीमा में उड़ान भरती है। इसके विपरीत कविता की व्यापक होती है क्योंकि कवि के भाव असीमित है, उनकी कोई निश्चित सीमा नहीं होती। कविता घर-घर की कहानी कहती है। वह पंख लगकर हर जगह उद्ध सकती है। अतः उसकी उड्डान चिडिया की उड्डान से कहीं आगे है।
(ख) कुंभकरण रावण का भाई था। वह लँबे-चौँडे और बलिष्ठ शरीर का स्वामी था। उसे लंबे समय तक सोने का वरदान मिला हुआ था। लोग उसे देखकर ही भयभीत हो जाते थे। उसे देखकर ऐसा लगता था कि मानों साक्षात् काल सामने आ गया हो। वह मुँहफट तथा स्पष्ट वका था। स्पष्ट बोलते समय वह किसी का ध्यान नहीं करता था।
मेघनाद की मृत्यु के पश्चात् रावण के द्वारा उसे बुलाया जाता है। वहाँ जाने पर वह रावण का मुख देखकर उससे पूछता है कि तुम्हारे औंठ और मुँह क्यों सूखे हुए हैं? रावण से राम के साथ युद्ध की बात सुनने पर वह रावण को फटकार लगाता है तथा उसे कहता हैं कि अब तुम्हें कोई नहीं बचा सकता। इस प्रकार उसने रावण को उसके विनाश संबंधी सच्चाई का आईंना दिखाया।
(ग) यह गीत प्रसिद्ध कवि हरिवंशराय बच्चन की ‘निशा-निमंत्रण ‘ से लिया गया है। इसमें कवि ने प्रकृति की दैनिक परिवर्तनशीलता के सन्दर्भ में प्राणी वर्ग के धड़कते ह्लदय को सुनने की काव्यात्मक कोशिश को व्यक्त करता है। किसी प्रिय आलंबन या विषय से भावी साक्षात्कार का आशवासन ही हमारे प्रयास के की गति में चंचलता भर सकता है। इससे हम शिधिलता और फिर जझ़ता को प्राप्त होने से बच जाते हैं। यह गीत इस बड़े सत्य के साथ समय के गुजरते जाने के एहसास में लक्क्य प्राप्ति के लिए कुछ कर गुजरने का जक्बा भी लिए हूए है।
प्रश्न 11.
निम्नलिखित तीन में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए। (2 x 2 = 4)
(क) सिल और स्लेट का उदाहरण देकर कवि ने आकाश के रंग के बारे में क्या कहा है?
(ख) कविता को क्या संज्ञा दी गई हैं? क्यों? ‘कविता के बहाने’ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
(ग) श्रीराम सुमित्रा माता का स्मरण करके दुखी क्यों होते हैं?
उत्तर:
(क) कवि ने सिल और स्लेट के रंग की समानता आकाश के रंग से की है। थोर के समय आकारा का रंग गहरा नीला-काला होता है और उसयें थोड़ी-थोड़ी सूर्योंदय की लालिमा मिली हुई होती है।
(स) कविता को सेल की संज्ञा दी गई है। जिस प्रकार खेल का उदेश्य मनोरंजन व आत्मसंतुष्टि होता है, उसी प्रकार कविता भी शब्दों के माध्यम से मनोरंजन करती है तथा रचनाकार को संतुप्टि प्रदान करली है।
(ग) आर्राम सुमित्रा माता के विषय में चिंतित है क्योंकि उन्होने राम को हर तरह से हितैषी मानकर लक्ष्मण को उन्हें सौपा था। अतः वे उन्हें लक्ष्मण की मृत्यु का जवाब कैसे देंगे। वे लक्ष्मण से ही इसका खचाब पूहते है।
प्रश्न 12.
निम्नलिखित तीन में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए। (3 x 2 = 6)
(क) किस प्रकार लोग बाजार से न सच्चा लाभ उठा पाते हैं और न ही बाजार को सच्चा लाभ देते हैं, इस प्रकार के लोग बाजारूपन को किस प्रकार बढ़ाते हैं?
(ख) हजारी प्रसाद द्विवेदी ने नेताओं और कुछ पुराने व्यक्तियों की अधिकार लिप्सा पर किए गए व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।
(ग) भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहाती हो गई, कैसे? सोदाहरण लिखिए।
उत्तर:
(क) लेखक का मानना है कि समाज के कुछ लोग अपनी क्रय शकि के बल बाजार से वस्तुएँ तो खरीद लेते है पर वे अपनी जरुरत को नहीं जानते। इस प्रकार के लोग खुद हो बाजार से सख्या हाभ नहीं उठा पाते और 7 ही बाजार को सख्या हाभ दे पाते है। अपने धन के बल पर वे बाजार में छल-कपट को बद्कांवा देते है। इससे समाज में असंतोष उत्पन्न होता है। वे सामान्य लोगों के समक्ष अपनी क्रय शक्ति का बढ्र-चढ्रकर प्रदर्शन करते है। बे अपनी जस्तरत के लिए नहीं; बल्कि जान दिखाने के लिए उप्पाद खरीदते है। इस प्रकार वे बाजाएचपन को बढ़ावा देते है।
(ख) हजारी प्रसाद द्विवेदी ने नेताओं और कुछ पुराने व्यक्तियों की अंिकार लिप्सा पर कटु व्यंग्य किया है। उनका कथन है कि जो संखार में आया है उसका जाना निशिघत है। जन्य-मूल्यु जीवन के शास्वत सत्य है। समय परिवर्तनशील है जो सबको मिटा देता है। इस पर भी नेताओं और पुराने व्यक्तियों की अधिकार लिप्या शांत नहीं होती। न जाने बे अपने अधिकारों पर ही क्यों जमे रहना चाहते है। वे समय रहते सावधान क्यों नहीं हो जते। उन्हें ज्ञात होना चाहिए कि बुद्धापा और मूल्यु इस संखार के शारवत सत्य है जो एक दिन सबको आना है। इसलिए, नेता और पुराने व्यक्ति भी इस समय से बच नहीं सकते ।
(ग) भक्तिन देहाती महिला थी। शाहर में आकर उसने स्वयं चें कोई परिवर्तन नहीं किया। कपर से वह दूसरों को भी अपने अनुसार बना लेना चालती है, पर अपने मामले में उसे किसी प्रकार का हस्तक्षेप पसंद नहीं था। उसने लेस्डिका का मीट खाना बिएकुल बंद कर दिया। उसने गाही दाल व मोटी रोटी सिताकर लेसिकका की र्वास्ध्य संबंधी चिंता दूर कर दी। अब लेखिका को रात को मकई का दलिया, सचेरे मड्डा, तिल लगाकर बाजरे के बनाए हुए ठंड पुए, ज्वार के भुने हुए भुहे के हरे-हरे दानों की स्ञिचड़ी व सफेद महुए की लपसी मिलने लगी। इन सखको वह स्वाद से खाने लगी। इसके अतिरिक उसने महादेवी को देहाती भाषा भी सिखा दी। इस प्रकार महादेवी धी देलाती बन गई।
प्रश्न 13.
निम्नलिखित तीन में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए। (2 x 2 = 4)
(क) भक्तिन के आने से लेखिका अपनी असुविधाएँ क्यों छिपाने लगीं?
(ख) पहलवान की ढोलक’ कहानी का प्रतीकार्थ स्पष्ट कीजिए।
(ग) काले मेघा पानी दे’ संस्मरण विज्ञान के सत्य पर सहज प्रेम की विजय का चित्र प्रस्तुत करता है- स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
(क) यक्किन के आने से लेटिकिका के खान-पान घें बहुत परिवर्तन आ गए। उसे मीट, भी आदि पसंद धा। उसके स्वास्थ्य को लेकर उसके परिवार वाले थी चिंतित रहते थे। घर वालों ने उसके लिए अलग खाने की क्यवस्था कर दी थी। अब वह मीठे व घी से विरकि करने लगी ची। यदि हेखिका को कोई अरुलिधा होती भी थी तो वह उसे भक्तिन को नहाँ बताती थी। धक्किन ने उसे जीवन की सरलता का पाठ पढ़ा दिया।
(ख) ‘पहलवान की होलक’ कहानी व्यवस्थी के बदलने के साध लोक-कला और इसके कलाकार के अप्रासंगिक हो जाने को रेखांकित करती है। राजा साहल के मरते ही नयी व्यवस्था ने जन्त लिया। पुराने संबंध समाप्त कर दिए गए। पहुलवानी जैसा लोकरेल समाष्त कर दिया गया। यह ‘धारत’ पर ‘इंडिय” के छा जाने का प्रतीक है। यह व्यवस्था लोक-कलाकार को भूखा मरने पर पजबूर कर देती है।
(ग) ‘काले मेघा पानी दे’ संस्मरण में वर्षी न होना, सूखा पक्ना आदि के वियय में विज्ञान अपना तर्क देता है और वर्धा न होने जैसी समस्या के सही कारणों का ज्ञान कराते हुए हमें सत्य से परिचित कराता है। इस सर्य पर लोक-प्रणलित विश्वास और सहल प्रेम की जीत हुई है क्योंक लोग इस समस्थ का हल अपने-अपने छंग से हैछने में जुट जते है, जिनका कोई बैज्ञानिक आधार नहीं है। लोगों में प्रचलित विश्वास इतना पुष्ट है कि वे लिज्ञान की बात मानने को लैयार नहीं होते।